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दरारों से झाँकती रोशनी
दरारों से झाँकती रोशनी
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हर मन में कुछ भाव अनकहे रह जाते हैं, कुछ अनुभव यादों में बस जाते हैं और कुछ संवेदनाएँ शब्दों का रूप लेकर कविता बन जाती हैं। उषा लाल की कविताओं का यह संग्रह जीवन के इन्हीं विविध रंगों और मन के अनगिनत भावों की अभिव्यक्ति है। आशा और निराशा, सुख और दुःख, जीवन के अनुभव और स्त्री मन की संवेदनाएँ, इन रचनाओं में सहज रूप से अभिव्यक्त हुई हैं।
यह संग्रह पाठकों को अपने भीतर झाँकने और उन भावनाओं से जुड़ने का अवसर देता है, जिन्हें हम अक्सर महसूस तो करते हैं, पर शब्द नहीं दे पाते।
SKU:9798904401115
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