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चार लाइनों में

चार लाइनों में

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ज़िंदगी अगर सवाल है, तो ज़िंदगी ही उसका जवाब भी है। बस महत्व केवल इस बात का होता है, कि परीक्षक तथा परीक्षार्थी का दृष्टिकोण, परीक्षा का दर्शन, किस दर्शन से करता है। हर किसी की जिंदगी के अनुभवों एवं यादों को सहेजकर, अगर शब्दों की माला बना ली जाए तो वह एक रंग बिरंगी एवं खुशबू से सराबोर और मंत्रमुक्त करने वाली होगी। प्रस्तुत संग्रह में मेरे द्वारा अपने अनुभवों को "चार लाइनों में, अल्फ़ाज़ ज़िंदगी के" द्वारा व्यक्त करने का प्रयास किया गया है। खामोशियां और दिल की उथल-पुथल के मध्य व्याप्त संवेदनशीलता को अनुभव द्वारा चार पंक्तियों में सजाने के प्रयत्न में सफलता तथा असफलता के पैमाने को मैं, पाठकों की आलोचनात्मक प्रतिक्रिया पर छोड़ता हूं।

SKU:9798900817347

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