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बिखरी स्याही

बिखरी स्याही

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कविता केवल शब्द नहीं, समय के कैनवास पर चेतना की गूंज है। ​25 कविताओं का यह संग्रह पौराणिक इतिहास, सामाजिक यथार्थ और आत्मीय संवेदनाओं का एक अनूठा संगम है।इसमें जहाँ 'यशोधरा का तंज' और 'द्रौपदी का स्वाभिमान' इतिहास के उपेक्षित स्त्री-पक्ष की आवाज़ बनते हैं, वहीं 'श्री कृष्ण और अर्जुन' के माध्यम से जीवन का गूढ़ दर्शन प्रकट होता है। 'बिहार की माटी' का गौरव, 'माँ' की निश्छल ममता और 'सामाजिक मुद्दों' पर तीखा प्रहार—यह संग्रह हर पाठक के हृदय को छूने और सोचने पर मजबूर करने वाला है।

SKU:9789376661749

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