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प्रियदर्शनी

प्रियदर्शनी

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यह मैं उन्हें प्रियदर्शनी के लिए लिख रहा हूं जिनसे संभवत में कभी नहीं मिल पाऊंगा यह कविता मुख्यतः मैं हिंदुस्तानी खड़ी बोली भाषा में ही लिखा है लेकिन इसमें मैं ब्रज, अवधि, राजस्थानी, उर्दू और फारसी के भी कुछ शब्द जुड़े हैं ऐसी कविताओं को लिखने की प्रेरणा मुझे भारतीय इतिहास के कुछ महान संतों से मिली है जैसे कि मीराबाई, कबीरदास, तुलसीदास, रविदास, सूरदास आदी अगर आप इन कविताओं को पढ़ेंगे तो कुछ स्थानों पर आपको उनकी झलक महसूस हो सकती है यह पूर्ण रूप से मुक्त छंद में लिखी गई है परंतु इनमें से अधिकतर को दोहा के करीब लाने का प्रयास किया गया है

SKU:9789376426812

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