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बातों में खनक, आँखों में उदासी

बातों में खनक, आँखों में उदासी

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यह कहानी किसी एक की नहीं, बल्कि उस हर इंसान की है जो कभी 'जुनून' और 'सुकून' की उस अंधेरी गली में खड़ा हुआ है, जहाँ से वापसी का रास्ता खुद से होकर गुज़रता है। यह किताब उन सफेद धागों की तरह है जो कभी उलझते हैं, तो कभी सुलझते हैं। यह अमृता और इमरोज़ के उस मिथक को तोड़ती है जहाँ हर किसी के हिस्से में एक खाली मकान और इंतज़ार करने वाला प्यार नहीं होता। यह एक लड़की के खयालों से हक़ीक़त तक के उस टकराव की दास्तां है, जो आपको यह सोचने पर मजबूर कर देगी कि "तेरी याद के बाद, मुझे अब मेरी भी याद आती है।" अगर आप भी अपनी ज़िंदगी के किसी ऐसे 'फेज़' में हैं जहाँ तलाश जारी है, तो शायद इन पन्नों में आप खुद से मिल जाएँ। क्योंकि ढूँढने से भगवान भी मिलते हैं, पर क्या आप खुद को ढूँढ पाए?

SKU:9789375432227

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