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meri anubhootiyan

meri anubhootiyan

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पुस्तक में अधिकतर रचनाएं स्वांतः सुखाय के लिए लिखी गई हैं ।जो देखा, मन को छुआ,अनुभव किया, लिख दिया । जो भोगा वही लिखा , यथार्थ को ही लिपिबद्ध किया,जैसे "कुम्हार " रचना-एक विवाह में गई थी ,वहां चाक पूजन होता देखा । उसी को दार्शनिक जामा पहनाया,कुम्हार के प्रति इतना आदर भाव देखकर मन भावुक हो गया और लिख दिया। "एक बूढ़ा चेहरा "-एक बुजुर्ग की जिंदगी देखी तब लिखा। "व्हाट्सएप" तो रोज की जिंदगी में आप सब भी अनुभव करते हैं। "मां" के ऊपर तो जितना लिखा जाए कम है। "रिश्ते" और "सावन" आज की कड़वी सच्चाई है। यथार्थ ही मेरी कविता की पहचान बन गई है ।

SKU:9789375275992

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