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औरत सा हूं
औरत सा हूं
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जो आपके लिए सबकुछ हैं उनसे सबकुछ कह देना आसान नहीं होता। इसी सबकुछ को अगर शब्दों में घुमाकर Indirectly कहा जाए तो वो कविता कहलाती है। जैसे अगर आप माँ को Thank you बोलो तो माँ बहुत नॉर्मल रिएक्शन देंगी लेकिन अगर आप कविता के ज़रिए ये बताओ कि माँ कितने त्याग करती है और उन त्याग से उसके बच्चों पर कितना पाप चढ़ता है तो शायद माँ का रिएक्शन मुस्कराहट के साथ थोड़ा अलग होगा।
सीधी सपाट बातें जीवन में रंग नहीं भरती लेकिन पिरोकर कही गई बातें दिल दिमाग़ दोनों पर असर डालती है। प्यार में रहते हुए प्यार मोहब्बत से परे एक इंसान के इंसान होने की परिभाषा इस किताब में लिखी कविताओं के ज़रिये बताने की कोशिश की गई है।
SKU:9789375274483
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