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रोशनी बनना,परछाई नहीं

रोशनी बनना,परछाई नहीं

Regular price Rs. 210.00
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“रोशनी बनना, परछाई नहीं”— यह केवल एक शीर्षक नहीं, बल्कि एक पुकार है,एक दृष्टि है,एक संकल्प है,एक ठहराव है। जीवन की तेज़ रफ़्तार में हम अक्सर बाहरी दुनिया की कठोर वास्तविकताओं में उलझते-उलझते अपने भीतर की आवाज़ को सुनना भूल जाते हैं। दुनिया हमें जैसे देखना चाहती है, उसी रूप में ढलने की कोशिश में स्वयम् को कहीं खो देते हैं। यह पुस्तक एक छोटी-सी लौ है,जो भावों,अनुभवों और सूक्ष्म निरीक्षणों से बनी हुई है ।इसकी हर रचना एक दिशा दिखाती है—कहीं दर्पण बनकर तो कहीं एक सवाल बनकर और कहीं एक दीप, जो हमें अंधेरों से बाहर निकाल,हमारी खुद से पहचान कराती है। यदि यह पुस्तक आपके भीतर सोई हुई रोशनी को जगा दे और आपको अपने आप से एक कदम और जोड़ दे,तो मेरा लेखन सार्थक हो जाएगा । “हकीकत से दूर ,दुनिया की परछाई

SKU:9781807158170

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