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स्त्री

स्त्री

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मेरी जो कविताएं हैं वो स्त्रियों पर हैं, मेरी कविताएं स्त्रियों को ये बताने के लिए हैं की वो कमजोर नहीं हैं वो चाहे तो क्या नहीं कर सकती हैं परन्तु वो पहला कदम बढ़ाने से डरती हैं, पहली बार आवाज़ उठाने से डरती हैं, और शायद आगे बढ़ने से भी डरती हैं। ये कविताएं समाज को भी ये समझाने के लिए हैं की शिक्षा पर सभी का बराबर अधिकार हैं, आज़ादी सभी को अच्छी लगती हैं स्त्रियों को भी, ये सोचकर की बेटी या बहु को पढ़ाने या आगे बढ़ाने से क्या मतलब, तो जान जाइये की आप दुनिया से बहुत पीछे चल रहे हैं या ये कहे की दुनिया भाग रही हैं और आप ठहर गए हैं। हमारे देश की स्त्रिया दूसरे देश में जाकर अपना और भारत का नाम रोशन कर रही हैं परन्तु खुद के देश में ही उन्हें वो सम्मान और मौका नहीं मिल रहा हैं।

SKU:9781807155179

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