{"product_id":"9798904400934","title":"झरते पारिजात","description":"पारिजात रात भर खिलता है और भोर होते-होते धरती पर झर जाता है, पर पीछे महक छोड़ जाता है। झरते पारिजात की कविताएँ भी ऐसी ही हैं: पीड़ा के वे पल जो झर गए, पर जिनकी सुगंध मन में बनी रही।\n\nयह संग्रह एक स्त्री के मन की यात्रा है, जो प्रेम की लालसा से विरह तक, भीतर की पीड़ा से आक्रोश तक, और प्रकृति की गोद से आत्म खोज तक जाती है।\n\nइनमें कोई उपदेश नहीं, कोई निष्कर्ष नहीं। जैसा मन ने कहा, वैसा ही लिखा है।\n\nअगर कोई पंक्ति आपको अपनी ही बात लगे, तो यह किताब आपके लिए है।","brand":"रीना त्रिपाठी","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":53377754628408,"sku":"9798904400934","price":218.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0860\/3648\/0312\/files\/9798904400934_front.jpg?v=1792385847","url":"https:\/\/store.bookleafpub.com\/products\/9798904400934","provider":"BookLeaf Publishing Bookstore","version":"1.0","type":"link"}