{"product_id":"9781807153519","title":"नजरिया","description":"हम बिना किसी नजरिये के इस दुनिया मे आये है । दो आँखे और एक मासुमियत ही होती है अपनी पहचान । इस सारी दुनियादारी से इक दिन हमारी आँखे खुलती है।सच खोजती नजरे धुंधली सी हो जाती है। फिर वो खोजती है एक सहारा ।सहारा नये नजरियों का और इस दुनिया को समझने के नये तरीकों का ।मेरा ये ‘नजरिया’ एक ऐसा ही सहारा है मेरा दृष्टिकोन जताने का । अगर आपको भाये तो फिर शायद आपसे जुडने का।वैसे एक कोशिश तो बनती है आपकी तरफ से- ये नया नजरिया समझने की!","brand":"अनिकेत कोठावळे","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":51685417943352,"sku":"9781807153519","price":210.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0860\/3648\/0312\/files\/image-1_078a050b-4b89-40e6-9cd4-57cc53cbe8d2.png?v=1770031708","url":"https:\/\/store.bookleafpub.com\/products\/9781807153519","provider":"BookLeaf Publishing Bookstore","version":"1.0","type":"link"}